अधूरी इच्छा (बेरोज़गार युवाओं के लिए)
- Mister Bhat
- Aug 27, 2025
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डिग्रियाँ हैं हाथों में,
मगर खाली है जेब की राह।
सपनों का बोझ सीने में,
पर काम का नहीं कोई गवाह।
सुबह अख़बार नौकरी ढूँढता हूँ,
शाम को निराशा निगल जाती है।
रिश्तेदार हँसकर ताने देते हैं,
"इतनी पढ़ाई का क्या फ़ायदा हुआ?" पूछ जाते हैं।
दिल चाहता है —
कुछ कर दिखाऊँ, परिवार का सहारा बनूँ,
मगर हालात कहते हैं —
बस इंतज़ार करो, और धैर्य रखो।
अधूरी इच्छा सीने में चुभती है,
पर ये हार का संकेत नहीं।
ये आग है, जो जलकर कहती है —
"युवा हूँ, मैं हार नहीं मानूँगा।"
एक दिन यही बेरोज़गारी,
मेरे जुनून की गवाही बनेगी।
और मेरी अधूरी इच्छाएँ,
मेरा मुकम्मल इतिहास लिखेंगी।

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